माता-पिता अपने टीनएजर बच्चों को सोशल मीडिया का सही तरीके से उपयोग करना कैसे सिखा सकते हैं, इसकी स्टडी करने वाले एक मनोवैज्ञानिक और शिक्षाविद के तौर पर मैंने आपके जैसे कई लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में सुना है. टीनएजर बच्चे को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रखने के साथ-साथ सोशल मीडिया ऐप्स व प्लेटफ़ॉर्म में लगातार हो रहे बदलावों को समझना आपको मुश्किल लग सकता है. इसलिए, Instagram ने टीनएजर अकाउंट के लिए नई सेटिंग उपलब्ध कराई हैं. ये सेटिंग उपयोग करने में आसान हैं, परिवार की अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से आसानी से बदली जा सकती हैं और ज़्यादा बेहतर सुरक्षा देती हैं.
माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि सोशल मीडिया पर उनका टीनएजर बच्चा जो कंटेंट देख रहा है, वह उसकी उम्र के हिसाब से सही है या नहीं और कभी-कभी उन्हें मौजूदा पेरेंटल कंट्रोल समझ में ही नहीं आते हैं या सीमित लगते हैं. Instagram के ये नए अपडेट इन दोनों समस्याओं का समाधान करते हैं. इसके लिए इनमें टीनएजर बच्चों को पहले से ही सिर्फ़ 13+ कंटेंट रेटिंग पर आधारित कंटेंट ही देखने की परमिशन होगी और इनमें माता-पिता के लिए उपयोग करने में आसान अतिरिक्त कंट्रोल दिए गए हैं. नीचे, आपको मुख्य अपडेट की जानकारी के साथ-साथ उनके बारे में अपने टीनएजर बच्चे के साथ चर्चा करने के सुझाव भी मिलेंगे.
हर परिवार अपने टीनएजर बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रखना चाहता है, लेकिन माता-पिता यह भी जानते हैं कि "सही" कंटेंट की परिभाषा हर टीनएजर बच्चे या भाई-बहन तक के लिए भी एक जैसी नहीं हो सकती. हर परिवार की अपनी मान्यताएँ होती हैं और अलग-अलग टीनएजर बच्चों की सोचने समझने की क्षमता अलग-अलग होती है. इसलिए, कई माता-पिता एक जैसे कंट्रोल के बजाय, अपने टीनएजर बच्चे को दिखने वाले कंटेंट को कस्टमाइज़ करने के लिए ज़्यादा विकल्प चाहते थे. Instagram की नई सेटिंग इसी बात को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जो माता-पिता को ज़्यादा विकल्प, ज़्यादा आत्मविश्वास और ज़्यादा भरोसा देती हैं और माता-पिता इन्हें अपने टीनएजर बच्चे के साथ मिलकर सेट कर सकते हैं
माता-पिता अक्सर इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि सोशल मीडिया पर उनका टीनएजर बच्चा जो कंटेंट देख रहा है, वह उसकी उम्र के हिसाब से सही है या नहीं और कभी-कभी उन्हें मौजूदा पेरेंटल कंट्रोल समझ में ही नहीं आते हैं या सीमित लगते हैं. Instagram के ये नए अपडेट इन दोनों समस्याओं का समाधान करते हैं. इसके लिए इनमें टीनएजर बच्चों को पहले से ही सिर्फ़ 13+ कंटेंट रेटिंग पर आधारित कंटेंट ही देखने की परमिशन होगी और इनमें माता-पिता के लिए उपयोग करने में आसान अतिरिक्त कंट्रोल दिए गए हैं. नीचे, आपको मुख्य अपडेट की जानकारी के साथ-साथ उनके बारे में अपने टीनएजर बच्चे के साथ चर्चा करने के सुझाव भी मिलेंगे.
हर परिवार अपने टीनएजर बच्चों को ऑनलाइन दुनिया में सुरक्षित रखना चाहता है, लेकिन माता-पिता यह भी जानते हैं कि "सही" कंटेंट की परिभाषा हर टीनएजर बच्चे या भाई-बहन तक के लिए भी एक जैसी नहीं हो सकती. हर परिवार की अपनी मान्यताएँ होती हैं और अलग-अलग टीनएजर बच्चों की सोचने समझने की क्षमता अलग-अलग होती है. इसलिए, कई माता-पिता एक जैसे कंट्रोल के बजाय, अपने टीनएजर बच्चे को दिखने वाले कंटेंट को कस्टमाइज़ करने के लिए ज़्यादा विकल्प चाहते थे. Instagram की नई सेटिंग इसी बात को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जो माता-पिता को ज़्यादा विकल्प, ज़्यादा आत्मविश्वास और ज़्यादा भरोसा देती हैं और माता-पिता इन्हें अपने टीनएजर बच्चे के साथ मिलकर सेट कर सकते हैं
नई सेटिंग में क्या-क्या शामिल है और परिवारों को इनसे किस तरह मदद मिलती है?
टीनएजर अकाउंट को अपने आप इस अपडेट की गई डिफ़ॉल्ट “13+” सेटिंग में रखा जाएगा, जो 13+ कंटेंट रेटिंग पर आधारित है. टीनएजर बच्चे, माता-पिता की परमिशन के बिना इस डिफ़ॉल्ट सेटिंग की सख्ती कम नहीं कर सकते. माता-पिता भी सख्ती कम करने की परमिशन सिर्फ़ तभी दे सकते हैं, जब उन्होंने निगरानी का फ़ीचर चालू कर लिया हो.
जिन माता-पिता को ऐसा लगे कि 13+ स्टैंडर्ड पर आधारित कंटेंट भी उनके टीनएजर बच्चे के हिसाब से सही नहीं है और जिन्हें अतिरिक्त कंट्रोल चाहिए हों, उनके लिए Instagram एक नई और ज़्यादा सख्त “सीमित कंटेंट” सेटिंग भी उपलब्ध करवा रहा है, जो Instagram पर टीनएजर अकाउंट अनुभव से और भी ज़्यादा कंटेंट को फ़िल्टर करेगी. सीमित कंटेंट वाली सेटिंग, सर्च रिज़ल्ट को भी और सीमित कर देगी और टीनएजर बच्चों को पोस्ट पर किए गए कमेंट देखने, कमेंट करने या कमेंट पाने से रोकेगी.
टीनएजर अकाउंट की नई सेटिंग को ऐसा ऑनलाइन अनुभव तैयार करने में माता-पिता और टीनएजर बच्चों की मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो सुरक्षित और उम्र के हिसाब से सही हो. इसके बावजूद, इस बात का पूरा ध्यान रखना ज़रूरी होता है कि टीनएजर बच्चे जब भी चाहें, तब अपने माता-पिता से बातचीत कर सकें, ताकि उन्हें पता रहे कि वे ऑफ़लाइन या ऑनलाइन दुनिया में कभी भी कोई परेशानी या असहजता होने पर आपके पास आ सकते हैं. माता-पिता के लिए अपने टीनएजर बच्चों के साथ इस तरह की बातचीत शुरू करना हर बार आसान नहीं होता, लेकिन यहाँ ऐसी बातचीत को आसान बनाने के लिए कुछ सुझाव दिए गए हैं:
- वे जिस तरह का कंटेंट देख रहे हों, उसमें दिलचस्पी बनाए रखें. ऑनलाइन सुरक्षा का मतलब सिर्फ़ कंटेंट को ब्लॉक करना ही नहीं होता. इसका मतलब उन्हें दिखने वाले कंटेंट के बारे में उत्सुकता दिखाना और उसके बारे में उनके साथ बात करना होता है. अपने टीनएजर बच्चे से कहें कि वे अपनी फ़ीड में से या कोई ट्रेंडिंग कंटेंट आपके साथ शेयर करें.
- अपनी ओर से बातचीत शुरू करें. इसका इंतज़ार न करें कि आपका बच्चा आगे रहकर आपसे बात करे. यहाँ तक कि हल्की-फुल्की पोस्ट भी बातचीत शुरू करने के लिए अच्छी हो सकती हैं. यह पूछकर देखें, “तुम्हारे हिसाब से लोग इसे क्यों पसंद कर रहे हैं?” या “तुम्हें इसमें क्या मज़ेदार लगा?” और अगर कोई चीज़ सही न लगे, तो पूछें कि "क्या इससे तुम्हें कोई परेशानी हुई?"
- बातचीत को वहीं बंद न करें. कुछ विषय असहज होते हैं, खास तौर पर टीनएजर बच्चों के साथ बातचीत करने के हिसाब से, लेकिन उन पर बातचीत न करने से बच्चों को यह लग सकता है कि आप उनकी मदद करने के लिए तैयार नहीं हैं. जब आपको बात करना मुश्किल लगे, तो आप यह कह सकते हैं: “इस बारे में बात करना मुश्किल तो है, लेकिन मुझे फिर भी इस बारे में बात करनी है.” अगर आपको लगे कि आप किसी विषय पर और बात नहीं कर पाएँगे, तो उस पर बाद में फिर से बात करने का सुझाव दें: “अभी के लिए इतना काफ़ी है, हम इस बारे में बाद में फिर से बात कर सकते हैं.”
- नियमित रूप से बातचीत करते रहें. बातचीत को जारी रखना सबसे सुरक्षित तरीका होता है. Meta के नए टूल्स आपके टीनएजर बच्चे के अनुभव को पर्सनलाइज़ करना आसान बनाते हैं, लेकिन ये तब सबसे बढ़िया काम करते हैं जब बच्चों के साथ इस बारे में नियमित रूप से बातचीत की जाए कि उन्हें कैसा कंटेंट दिखाई दे रहा है और वह उन्हें कैसा लगता है.
सोशल मीडिया के लिए सीमाएँ तय करना ज़रूरी होता है, लेकिन भरोसा कायम करना और बातचीत के लिए तैयार रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है.
Instagram की नई कंटेंट सेटिंग, जैसे कि डिफ़ॉल्ट 13+ सेटिंग और सीमित कंटेंट वाली सेटिंग, आपके टीनएजर बच्चे के साथ इस बारे में बातचीत शुरू करने का एक शानदार तरीका हो सकती हैं कि कुछ चीज़ें क्यों ब्लॉक की गई हैं और ये सेटिंग अभी उनके लिए सबसे अच्छी क्यों हैं. ये टूल टीनएजर बच्चों को न सिर्फ़ कुछ खास तरह के कंटेंट और अकाउंट से बचाने के लिए, बल्कि उन्हें उन अनुभवों से भी बचाने के लिए बनाए गए हैं, जो उन्हें मुश्किल लग सकते हैं या जो उनकी उम्र के हिसाब से सही नहीं होते हैं. ये बदलाव सभी टीनएजर अकाउंट में उपलब्ध हो जाएँगे, इसलिए अपने टीनएजर बच्चे से इस बारे में बात करें कि ये क्यों मायने रखते हैं:
“यह सेटिंग यह पक्का करती है कि आपको वही कंटेंट दिखाई दे, जो आपकी उम्र के हिसाब से सही हो और आपको ऐसे अकाउंट या ऐसा कंटेंट न दिखाई दे, जो आपकी उम्र के हिसाब से सही नहीं हो.”
इन नए सुरक्षा उपायों के अलावा, Meta के ऐप्स, कुछ अतिरिक्त डिफ़ॉल्ट सुरक्षा उपाय और निगरानी की वैकल्पिक सुविधा भी देते हैं. आप फ़ैमिली सेंटर पर जाकर इन सभी टूल्स के बारे में और जानकारी पा सकते हैं.
टीनएजर अकाउंट के नए फ़ीचर्स माता-पिता को ज़्यादा कंट्रोल और सुविधा देते हैं, लेकिन फिर भी आपको इस बारे में बातचीत करते रहना चाहिए कि आपका टीनएजर बच्चा ऑनलाइन क्या देख रहा है. आखिर में, ये सेटिंग असली समस्याओं के समाधान के तौर पर उपलब्ध कराई गई हैं: जैसे कि खुलकर बातचीत करना, भरोसा जीतना और सोशल मीडिया का उपयोग करने के सुरक्षित व सकारात्मक तरीके सीखने में अपने टीनएजर बच्चे की मदद करना.
डॉ. रेचल रॉजर्स, Meta की यूथ एडवाइज़री काउंसिल की मेंबर हैं और Meta के युवा सुरक्षा प्रयासों में एक्सपर्ट के तौर पर अपना योगदान देती हैं. डॉ. रॉजर्स को टीनएजर अकाउंट के नए अपडेट के बारे में एक आर्टिकल लिखने के लिए आमंत्रित किया गया था और उन्हें अपना समय देने के बदले में पेमेंट किया गया था.
सोशल मीडिया और मूवीज़ के बीच बहुत अंतर है. हमने अपनी कंटेंट सेटिंग को अपडेट करते समय MPA के साथ काम नहीं किया. वे Instagram पर किसी भी कंटेंट को रेटिंग नहीं दे रहे हैं और वे किसी भी तरह से हमारी कंटेंट सेटिंग का समर्थन नहीं कर रहे हैं या उन्हें मंज़ूरी नहीं दे रहे हैं. इसके बजाय, हमने MPA की सार्वजनिक गाइडलाइन से प्रेरणा ली, जिनसे माता/पिता पहले से ही परिचित हैं. साथ ही, हमने माता/पिता के फ़ीडबैक को भी ध्यान में रखा है. हमारे कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम, मूवी रेटिंग बोर्ड की तरह काम नहीं करते, इसलिए हो सकता है कि अनुभव बिल्कुल एक जैसा न हो.
फ़ीचर और टूल
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