अपने बच्चे से बातचीत करने और उन्हें सपोर्ट करने के 5 स्टेप.
डिजिटल टेक्नोलॉजी कई बच्चों के जीवन में बड़ी भूमिका निभाती है. इससे उन्हें नई चीज़ें सीखने, लोगों से जुड़ने और मनोरंजन करने के अवसर मिलते हैं. लेकिन ऑनलाइन मौजूदगी के जोखिम भी होते हैं. बच्चों को ऑनलाइन धमकियों या उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें अनुचित कंटेंट दिखाई दे सकता है या उन्हें ऐसे अनुभवों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे वे परेशान, असहज या डरा हुआ महसूस कर सकते हैं. अगर आपके बच्चे को इस तरह के ऑनलाइन अनुभव का सामना करना पड़े, तो यहाँ ऐसे पाँच स्टेप बताए गए हैं, जिनके ज़रिए आप उन्हें सपोर्ट दे सकते हैं.
1. यह पहचानना कि कुछ गलत हुआ है
जब कुछ गलत होता है, तो हर बच्चा सीधे अपने गार्जियन के पास नहीं जाता. कुछ माता-पिता को अपने बच्चे के संभावित ऑनलाइन खराब अनुभव के बारे में पहली बार किसी टीचर या किसी अन्य माता-पिता से पता चलता है. अन्य माता-पिता अपने बच्चे के डिवाइस पर अजीब या अनुचित मैसेज, कमेंट या फ़ोटो देख सकते हैं. अगर आपका बच्चा तुरंत आपके पास नहीं आता है, तो इस बात से परेशान या गुस्सा न हों. जो कुछ हुआ, उसके कारण वे शर्मिंदा या डरा हुआ महसूस कर सकते हैं या इस बात को लेकर चिंतित हो सकते हैं कि आप कैसा रिएक्शन देंगे.
उन संकेतों को पहचानने की कोशिश करें कि कहीं आपका बच्चा किसी बात को लेकर चिंतित या परेशान तो नहीं है. आप अपने बच्चे को सबसे अच्छी तरह जानते हैं, इसलिए कुछ भी गलत होने पर आपको पता चल ही जाएगा, लेकिन फिर भी खराब अनुभव के कुछ सामान्य संकेतों में ये शामिल हैं:
- सिरदर्द या पेट दर्द
- नींद न आना
- भूख न लगना या बहुत ज़्यादा भूख लगना
- बिना किसी कारण उदासी, चिड़चिड़ापन, चिंता या घबराहट
- ऑनलाइन समय बिताने के बाद परेशान होना
- अपने डिवाइस से दूर रहना या अपनी ऑनलाइन एक्टिविटी को कुछ ज़्यादा ही छिपाना
- स्कूल जाने से डरना या लोगों के सामने जाने से बचना
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अगर आपको लगता है कि कुछ गलत हुआ है, तो अपने बच्चे को याद दिलाएँ कि वे आपसे या किसी और भरोसेमंद व्यक्ति से कभी भी बात कर सकते हैं और चाहे जो भी हो, आप हमेशा उनके साथ हैं.
2. अपने बच्चे को दिलासा देना
माता-पिता के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो सकता है कि उनके बच्चे ने ऑनलाइन किसी अनुचित या परेशान करने वाले अनुभव का सामना किया है. लेकिन याद रखें, अगर आप शांत रहेंगे और अपने बच्चे को यह महसूस कराएँगे कि उनकी बात सुनी जा रही है और उन्हें सपोर्ट किया जा रहा है, तो इस बात की ज़्यादा संभावना है कि वे अभी और आने वाले समय में भी आपसे खुलकर बात करेंगे.
शांत रहें: जवाब देने से पहले थोड़ा रुकें. आपका बच्चा आपकी प्रतिक्रिया देख रहा होगा, इसलिए शांत रहने की कोशिश करें, भले ही आप हैरान, गुस्से में या परेशान हों.
हो सकता है कि आप अपने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए सबसे पहले उससे डिवाइस या इंटरनेट की एक्सेस छीनने के बारे में सोचें, लेकिन इस तरह की प्रतिक्रिया से उन्हें लग सकता है कि उन्हें सज़ा दी जा रही है और भविष्य में उनकी आपके पास आने की संभावना कम हो सकती है.
सुनें: अपना पूरा ध्यान अपने बच्चे पर दें, उनकी पूरी बात ध्यान से सुनें और उन्हें बताने दें कि क्या हुआ था. अपने बच्चे की चिंताओं को गंभीरता से लें, बीच में रुकावट न डालें और तुरंत किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से बचें.
अगर आपका बच्चा आपको किसी ऐप या किसी गेम के बारे में बताता है या कुछ ऐसा कहता है, जिसका मतलब आपको पता नहीं है, तो बच्चे से उसे समझाने या दिखाने को कहें. उन्हें बताएँ कि आप उनकी बात ठीक से समझना चाहते हैं, ताकि आप उनकी सबसे अच्छी तरह से मदद कर सकें.
बातचीत आगे बढ़ाने वाले सवाल पूछें, जैसे: "क्या तुम मुझे दिखा सकते हो कि क्या हुआ था?", "उससे तुम्हें कैसा महसूस हुआ था?".
भरोसा दिलाएँ: अपने बच्चे को बताएँ कि आपके पास आकर उन्होंने सही काम किया है और वे बिल्कुल भी न घबराएँ. उन्हें भरोसा दिलाएँ कि आप उनकी मदद करने की पूरी कोशिश करेंगे.
उदाहरण के लिए: "मुझे खुशी है कि तुमने मुझे बताया. इसमें तुम्हारी गलती नहीं है और मैं तुम्हारे साथ हूँ. हम साथ मिलकर इसका हल निकालेंगे."
3. एक्शन लेना
कभी-कभी सिर्फ़ यह हो सकता है कि आपका बच्चा अपनी बात किसी को सुनाना चाहता हो. लेकिन अगर कुछ ज़्यादा गंभीर हुआ है, तो आपको उस घटना के बारे में उस ऐप पर रिपोर्ट करनी होगी, जहाँ वह घटना हुई है. साथ ही, आपको उनके स्कूल या पुलिस को भी रिपोर्ट करनी पड़ सकती है.
किसी को म्यूट, ब्लॉक या रिपोर्ट करना चाहते हैं? अपने बच्चे से बात करें कि उनके हिसाब से इस स्थिति में क्या करना अच्छा रहेगा. उदाहरण के लिए, क्या उन्हें किसी को म्यूट, ब्लॉक या उसकी रिपोर्ट कर देना चाहिए.
ज़्यादातर सोशल मीडिया ऐप्स और गेम्स में कई सुरक्षा और रिपोर्टिंग फ़ीचर होते हैं, जो कुछ भी गलत होने पर आपकी मदद करते हैं. बच्चों (और वयस्कों) को यह स्पष्ट नहीं हो सकता कि कौन-से फ़ीचर उपलब्ध हैं और वे कैसे काम करते हैं, इसलिए एक साथ अलग-अलग विकल्पों पर विचार करें और चर्चा करें कि हर एक फ़ीचर में क्या शामिल होगा.
यह भी ज़रूरी है कि आगे के लिए आपके बच्चे को उसके द्वारा डाउनलोड किए जाने वाले नए ऐप्स या उपयोग किए जाने वाले ऐप्स पर मौजूद यूज़र्स और कंटेंट की रिपोर्ट करने, उन्हें म्यूट करने या ब्लॉक करने का तरीका पता हो.
सबूत को सुरक्षित रखें: हो सकता है कि आप सबसे पहले अपने बच्चे के खराब अनुभव से संबंधित हर चीज़ को डिलीट कर देना चाहते हों, लेकिन अगर आप घटना की रिपोर्ट करने पर विचार कर रहे हैं, तो उन सभी मैसेज, फ़ोटो या पोस्ट को सेव करना या स्क्रीनशॉट लेना महत्वपूर्ण होता है, जो यह दिखाने में मदद कर सकते हैं कि क्या हुआ था.
रिसोर्स: Meta ऐप्स पर रिपोर्टिंग और सुरक्षा से जुड़े रिसोर्स यहाँ दिए गए हैं.
Take it Down नाम की वेबसाइट बताती है कि आप इंटरनेट से निजी पलों की फ़ोटो कैसे हटा सकते हैं.
अगर आप किसी कंपनी को अपनी समस्या की रिपोर्ट करते हैं और आपको कोई जवाब नहीं मिलता या आपको लगता है कि समस्या का समाधान नहीं हुआ है, तो रिपोर्ट को अगले स्तर पर ले जाने पर विचार करें. Facebook और Instagram पर, आप अपनी रिपोर्ट का स्टेटस देख सकते हैं और जहाँ लागू हो, वहाँ फ़ैसले का फिर से रिव्यू करने की रिक्वेस्ट भेज सकते हैं. याद रखें कि इन कंपनियों की ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों की सुरक्षा को गंभीरता से लें.
स्कूल: अगर घटना में आपके बच्चे के स्कूल के स्टूडेंट शामिल हैं, तो आपको स्कूल से बात करनी पड़ सकती है. आपने जो भी सबूत इकट्ठे किए हों, उन्हें स्कूल के अधिकारियों के साथ शेयर करें और चर्चा करें कि वे किस तरह ऐसे एक्शन ले सकते हैं, जिससे आपके बच्चे के लिए स्थिति और खराब न हो. आपको कोई भी हिंसक तरीका नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि व्यवहार को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए (न कि अपमान या सज़ा पर).
अगर आपके बच्चे के स्कूल में कोई काउंसलर है, तो आप अपने बच्चे के अनुभव के बारे में उनसे बात कर सकते हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि आप अपने बच्चे को सबसे अच्छी तरह कैसे सपोर्ट कर सकते हैं.
पुलिस या आपातकालीन सेवाएँ: अगर आपको अपने बच्चे की सुरक्षा के बारे में चिंता है, तो पुलिस या बच्चों की सुरक्षा करने वाले स्थानीय संगठन से संपर्क करें, ताकि वे आपकी तुरंत मदद कर सकें.
4. आपको प्रोफ़ेशनल सपोर्ट कब लेना चाहिए
अनुचित या नुकसान पहुँचाने वाला अनुभव बहुत ही परेशान करने वाला हो सकता है.
अपने बच्चे से बात करते रहें कि वह कैसा महसूस कर रहा है, उससे पूछते रहें, लेकिन घटना के बारे में सीधे बात न करें. सोशल मीडिया के उपयोग से दूर अन्य सकारात्मक एक्टिविटी ढूँढने में उसकी मदद करें, जैसे दोस्तों के साथ समय बिताना, पढ़ना, खेल खेलना या किसी म्यूज़िकल इंस्ट्रूमेंट की प्रैक्टिस करना.
अगर आपको अपने बच्चे के व्यवहार या मूड में लंबे समय तक चलने वाले बदलाव दिखाई दें, तो आपको किसी प्राइमरी हेल्थ केयर प्रोवाइडर से सलाह लेनी चाहिए.
कई देशों में कुछ खास हेल्पलाइन भी हैं, जिन पर आपका बच्चा फ़्री में कॉल कर सकता है और अनाम तरीके से किसी से बात कर सकता है. अपने देश में मदद पाने के लिए Child Helpline International या United for Global Mental Health पर जाएँ.
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5. भविष्य में अपने बच्चे को सुरक्षित रखने के तरीके
डिजिटल युग में बच्चों की परवरिश करना आसान नहीं है और खराब ऑनलाइन अनुभव आपको और आपके बच्चे को डरा सकता है. जो कुछ हुआ, उसका उपयोग एक अवसर के तौर पर करें और साथ मिलकर ऑनलाइन सुरक्षित रहने के तरीके देखें. साथ ही, अपने बच्चे को अच्छी तरह समझाएँ कि आप किसी भी चुनौती से निपटने में मदद करने के लिए हमेशा उनके साथ हैं.
अपने परिवार के नियमों पर फिर से विचार करें: अपने बच्चे से यह बात करें कि वे किसके साथ और कैसे बातचीत करते हैं, वे जो ऑनलाइन पोस्ट करते हैं उसे कौन देख सकता है और वे किन प्लेटफ़ॉर्म या कंटेंट को एक्सेस कर सकते हैं. उन्हें यह याद दिलाते रहें कि उनकी सुरक्षा व अच्छी सेहत आपकी सबसे बड़ी चिंता है और वे किसी भी सवाल या चिंता के लिए आपके या किसी और भरोसेमंद व्यक्ति के पास कभी भी जा सकते हैं.
छोटे बच्चों के लिए: पक्का करें कि ऐप और गेम आपके बच्चे की उम्र और विकास के हिसाब से उपयुक्त हों. अनुचित कंटेंट ब्लॉक करने और कुछ ऐप या वेबसाइटों की एक्सेस सीमित करने के लिए अपने इंटरनेट प्रोवाइडर व डिवाइस पर मौजूद पेरेंटल कंट्रोल्स और सेटिंग्स देखें.
टीनएजर बच्चों के लिए: उनके साथ मिलकर उनके फ़ेवरेट प्लेटफ़ॉर्म्स, ऐप्स और गेम्स की सुरक्षा सेटिंग्स देखें. अपनी किसी भी चिंता के बारे में खुलकर बात करें और उनकी बात सुनें.
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प्राइवेसी सेटिंग देखें: आपका बच्चा जिन डिवाइस, सोशल मीडिया, गेम और अन्य ऑनलाइन अकाउंट को एक्सेस करता है, उनकी प्राइवेसी सेटिंग देखें. प्राइवेसी सेटिंग को डेटा कलेक्शन कम करने के लिए सेट किया जाना चाहिए और डिवाइस को नए सॉफ़्टवेयर के साथ अपडेट रखा जाना चाहिए.
छोटे बच्चों के लिए: चेक करें कि सिर्फ़ दोस्त या परिवार वाले ही उनके साथ ऑनलाइन बातचीत कर सकें.
टीनएजर बच्चों के लिए: उनके साथ मिलकर चेक करें कि उनके फ़ेवरेट प्लेटफ़ॉर्म्स पर कैसी प्राइवेसी सेटिंग उपलब्ध हैं. उन्हें सेटिंग्स को नियमित रूप से चेक करने और उनमें ज़रूरत के हिसाब से बदलाव करने के लिए प्रोत्साहित करें.
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Facebook, Instagram और Meta Horizon पर मौजूद प्राइवेसी सेटिंग्स के बारे में ज़्यादा जानें और Facebook पर मौजूद प्राइवेसी चेक जैसे टूल आज़माएँ.
सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ावा दें: अपने बच्चे के साथ संदिग्ध या नुकसान पहुँचाने वाले ऑनलाइन व्यवहार को पहचानने के बारे में बात करें. पक्का करें कि वे यह समझते हों कि हर व्यक्ति को यह अधिकार है कि उसके साथ सम्मान और गरिमा का व्यवहार किया जाए व भेदभावपूर्ण या अनुचित व्यवहार कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता.
छोटे बच्चों के लिए: बताएँ कि ऑनलाइन हर कोई भरोसेमंद नहीं होता है और हमें इस बारे में सतर्क रहना चाहिए कि हम किससे बातचीत कर रहे हैं और कहाँ क्लिक कर रहे हैं. उन्हें याद दिलाएँ कि अगर उन्हें कभी ऐसा लगे कि कुछ “गलत” है, तो वे आपके पास आएँ, ताकि आप उनके साथ मिलकर उसका समाधान कर सकें.
टीनएजर बच्चों के लिए: उनकी बढ़ती हुई स्वतंत्रता और अच्छे फ़ैसले लेने की क्षमता को बढ़ाने के तरीके खोजें. उन्हें यह सोचने के लिए प्रोत्साहित करें कि वे ऑनलाइन किस तरह का कंटेंट देखें और शेयर करें. उनके अनुभवों के बारे में पूछें. क्या उन्हें कभी निजी जानकारी को ऑनलाइन शेयर करने का दबाव महसूस हुआ है या क्या वे किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं, जिसने ऐसा महसूस किया है? अगर उन्हें समस्या वाले व्यवहार का ऑनलाइन सामना करना पड़े, तो वे क्या करेंगे?
एक्टिव रहें: टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है और जैसे-जैसे आपका बच्चा बड़ा होगा, उसकी ऑनलाइन एक्टिविटी भी बदलती जाएगी. परिवार के तौर पर साथ मिलकर नए प्लेटफ़ॉर्म, गेम और ऐप एक्सप्लोर करें. जानें कि हर प्लेटफ़ॉर्म, गेम और ऐप में क्या शामिल है, प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा करें, नई चीज़ें सीखें और मज़े करते रहें.
जब आप अपने बच्चे के ऑनलाइन जीवन का एक्टिव हिस्सा बनेंगे, तो इससे न सिर्फ़ उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी, बल्कि हर अवसर का ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने में भी मदद मिलेगी.
यह आर्टिकल UNICEF के साथ मिलकर तैयार किया गया है. बच्चों की देखरेख से जुड़े ज़्यादा एक्सपर्ट सुझावों और निर्देशों के लिए, UNICEF पेरेंटिंग पर जाएँ.
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